श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.15.25

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

रजस्तमश्‍च सत्त्वेन सत्त्वं चोपशमेन च।

एतत् सर्वं गुरौ भक्‍त्या पुरुषो ह्यञ्जसा जयेत्॥ २५

rajastamaśca sattvena sattvaṃ copaśamena ca|

etat sarvaṃ gurau bhaktyā puruṣo hyañjasā jayet|| 25

अर्थ

सत्त्वगुणके द्वारा रजोगुण एवं तमोगुणपर और उपरतिके द्वारा सत्त्वगुणपर विजय प्राप्त करनी चाहिये। श्रीगुरुदेवकी भक्तिके द्वारा साधक इन सभी दोषोंपर सुगमतासे विजय प्राप्त कर सकता है॥ २५॥

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