श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.2.1

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अथ द्वितीयोऽध्यायः

हिरण्याक्षका वध होनेपर हिरण्यकशिपुका अपनी माता और कुटुम्बियोंको समझाना

नारद उवाच

भ्रातर्येवं विनिहते हरिणा क्रोडमू१र्तिना।

हिरण्यकशिपू राजन् पर्यतप्यद्रुषा शुचा॥ १

bhrātaryevaṃ vinihate hariṇā kroḍamūrtinā|

hiraṇyakaśipū rājan paryatapyadruṣā śucā|| 1

अर्थ

नारदजीने कहा—युधिष्ठिर! जब भगवान्‌ने वराहावतार धारण करके हिरण्याक्षको मार डाला, तब भाईके इस प्रकार मारे जानेपर हिरण्यकशिपु रोषसे जल-भुन गया और शोकसे सन्तप्त हो उठा॥ १॥✎ 580

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—रूपिणा।

    (मुद्रित पृष्ठ 811)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #580 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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