श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.2.12

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

यत्र यत्र द्विजा गावो वेदा वर्णाश्रमाः क्रियाः।

तं तं जनपदं यात सन्दीपयत वृश्‍चत॥ १२

yatra yatra dvijā gāvo vedā varṇāśramāḥ kriyāḥ|

taṃ taṃ janapadaṃ yāta sandīpayata vṛścata|| 12

अर्थ

जहाँ-जहाँ ब्राह्मण, गाय, वेद, वर्णाश्रम और धर्म-कर्म हों, उन-उन देशोंमें तुमलोग जाओ, उन्हें जला दो, उजाड़ डालो’॥ १२॥

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