एक दिन उसने कुलिंग पक्षीके एक जोड़ेको चारा चुगते देखा। उनमेंसे उस बहेलियेने मादा पक्षीको तो शीघ्र ही फँसा लिया॥ ५१॥✎ 2020
कुलिङ्गमिथुनं तत्र विचरत्समदृश्यत।
तयोः कुलिङ्गी सहसा लुब्धकेन प्रलोभिता॥ ५१
एक दिन उसने कुलिंग पक्षीके एक जोड़ेको चारा चुगते देखा। उनमेंसे उस बहेलियेने मादा पक्षीको तो शीघ्र ही फँसा लिया॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.2.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 817) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/2/51/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)