rudhirapriyaṃ tarpayiṣye bhrātaraṃ me gatavyathaḥ|| 8
अर्थ
अब मैं अपने इस शूलसे उसका गला काट डालूँगा और उसके खूनकी धारासे अपने रुधिरप्रेमी भाईका तर्पण करूँगा। तब कहीं मेरे हृदयकी पीड़ा शान्त होगी॥ ८॥
मच्छूलभिन्नग्रीवस्य भूरिणा रुधिरेण वै।
रुधिरप्रियं तर्पयिष्ये भ्रातरं मे गतव्यथः॥ ८
अब मैं अपने इस शूलसे उसका गला काट डालूँगा और उसके खूनकी धारासे अपने रुधिरप्रेमी भाईका तर्पण करूँगा। तब कहीं मेरे हृदयकी पीड़ा शान्त होगी॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.2.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 811) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/2/8/