उस मायावी शत्रुके नष्ट होनेपर, पेड़की जड़ कट जानेपर डालियोंकी तरह सब देवता अपने-आप सूख जायँगे। क्योंकि उनका जीवन तो विष्णु ही है॥ ९॥
तस्मिन् कूटेऽहिते नष्टे कृत्तमूले वनस्पतौ।
विटपा इव शुष्यन्ति विष्णुप्राणा दिवौकसः॥ ९
उस मायावी शत्रुके नष्ट होनेपर, पेड़की जड़ कट जानेपर डालियोंकी तरह सब देवता अपने-आप सूख जायँगे। क्योंकि उनका जीवन तो विष्णु ही है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.2.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 811) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/2/9/