श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.3.18

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अद्राक्षमहमेतत्ते हृत्सारं महदद्भुतम्।

दंशभक्षितदेहस्य प्राणा ह्यस्थिषु शेरते॥ १८

adrākṣamahametatte hṛtsāraṃ mahadadbhutam|

daṃśabhakṣitadehasya prāṇā hyasthiṣu śerate|| 18

अर्थ

मैंने तुम्हारे हृदयका अद्भुत बल देखा। अरे, डाँसोंने तुम्हारी देह खा डाली है। फिर भी तुम्हारे प्राण हड्डियोंके सहारे टिके हुए हैं॥ १८॥

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