श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.3.28

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

नम आद्याय बीजाय ज्ञानविज्ञानमूर्तये।

प्राणेन्द्रियमनोबुद्धिविकारैर्व्यक्तिमीयुषे॥ २८

nama ādyāya bījāya jñānavijñānamūrtaye|

prāṇendriyamanobuddhivikārairvyaktimīyuṣe|| 28

अर्थ

आप ही जगत‍्के मूल कारण हैं। ज्ञान और विज्ञान आपकी मूर्ति हैं। प्राण, इन्द्रिय, मन और बुद्धि आदि विकारोंके द्वारा आपने अपनेको प्रकट किया है॥ २८॥

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