श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.4.25

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मा भैष्ट विबुधश्रेष्ठाः सर्वेषां भद्रमस्तु वः।

मद्दर्शनं हि भूतानां सर्वश्रेयोपपत्तये॥ २५

mā bhaiṣṭa vibudhaśreṣṭhāḥ sarveṣāṃ bhadramastu vaḥ|

maddarśanaṃ hi bhūtānāṃ sarvaśreyopapattaye|| 25

अर्थ

‘श्रेष्ठ देवताओ! डरो मत। तुम सब लोगोंका कल्याण हो। मेरे दर्शनसे प्राणियोंको परम कल्याणकी प्राप्ति हो जाती है॥ २५॥✎ 582 583

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #582 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #583 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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