इस नीच दैत्यकी दुष्टताका मुझे पहलेसे ही पता है। मैं इसको मिटा दूँगा। अभी कुछ दिनोंतक समयकी प्रतीक्षा करो॥ २६॥✎ 582583
ज्ञातमेतस्य दौरात्म्यं दैतेयापसदस्य च।
तस्य शान्तिं करिष्यामि कालं तावत्प्रतीक्षत॥ २६
इस नीच दैत्यकी दुष्टताका मुझे पहलेसे ही पता है। मैं इसको मिटा दूँगा। अभी कुछ दिनोंतक समयकी प्रतीक्षा करो॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.4.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 825) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/4/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)