प्रह्लादजीने कहा—जिन मनुष्योंकी बुद्धि मोहसे ग्रस्त हो रही है, उन्हींको भगवान्की मायासे यह झूठा दुराग्रह होता देखा गया है कि यह ‘अपना’ है और यह ‘पराया’। उन मायापति भगवान्को मैं नमस्कार करता हूँ॥ ११॥✎ 585586
स्वः परश्चेत्यसद्ग्राहः पुंसां यन्मायया कृतः।
विमोहितधियां दृष्टस्तस्मै भगवते नमः॥ ११
प्रह्लादजीने कहा—जिन मनुष्योंकी बुद्धि मोहसे ग्रस्त हो रही है, उन्हींको भगवान्की मायासे यह झूठा दुराग्रह होता देखा गया है कि यह ‘अपना’ है और यह ‘पराया’। उन मायापति भगवान्को मैं नमस्कार करता हूँ॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.5.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 829) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/5/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)