कुलनन्दन प्रह्लाद! बताओ तो बेटा! हम तुम्हारे गुरुजन यह जानना चाहते हैं कि तुम्हारी बुद्धि स्वयं ऐसी हो गयी या किसीने सचमुच तुमको बहका दिया है?॥ १०॥
बुद्धिभेदः परकृत उताहो ते स्वतोऽभवत्।
भण्यतां श्रोतुकामानां गुरूणां कुलनन्दन॥ १०
कुलनन्दन प्रह्लाद! बताओ तो बेटा! हम तुम्हारे गुरुजन यह जानना चाहते हैं कि तुम्हारी बुद्धि स्वयं ऐसी हो गयी या किसीने सचमुच तुमको बहका दिया है?॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.5.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 829) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/5/10/