श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.5.9

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

वत्स प्रह्राद भद्रं ते सत्यं कथय मा मृषा।

बालानति कुतस्तुभ्यमेष बुद्धिविपर्ययः॥ ९

vatsa prahrāda bhadraṃ te satyaṃ kathaya mā mṛṣā|

bālānati kutastubhyameṣa buddhiviparyayaḥ|| 9

अर्थ

बेटा प्रह्लाद! तुम्हारा कल्याण हो। ठीक-ठीक बतलाना। देखो, झूठ न बोलना। यह तुम्हारी बुद्धि उलटी कैसे हो गयी? और किसी बालककी बुद्धि तो ऐसी नहीं हुई॥ ९॥

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