बेटा प्रह्लाद! तुम्हारा कल्याण हो। ठीक-ठीक बतलाना। देखो, झूठ न बोलना। यह तुम्हारी बुद्धि उलटी कैसे हो गयी? और किसी बालककी बुद्धि तो ऐसी नहीं हुई॥ ९॥
वत्स प्रह्राद भद्रं ते सत्यं कथय मा मृषा।
बालानति कुतस्तुभ्यमेष बुद्धिविपर्ययः॥ ९
बेटा प्रह्लाद! तुम्हारा कल्याण हो। ठीक-ठीक बतलाना। देखो, झूठ न बोलना। यह तुम्हारी बुद्धि उलटी कैसे हो गयी? और किसी बालककी बुद्धि तो ऐसी नहीं हुई॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.5.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 829) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/5/9/