श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.6.23

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

केवलानुभवानन्दस्वरूपः परमेश्‍वरः।

माययान्तर्हितैश्‍वर्य ईयते गुणसर्गया॥ २३

kevalānubhavānandasvarūpaḥ parameśvaraḥ|

māyayāntarhitaiśvarya īyate guṇasargayā|| 23

अर्थ

वे केवल अनुभवस्वरूप, आनन्दस्वरूप एकमात्र परमेश्‍वर ही हैं। गुणमयी सृष्टि करनेवाली मायाके द्वारा ही उनका ऐश्‍वर्य छिप रहा है। इसके निवृत्त होते ही उनके दर्शन हो जाते हैं॥ २३॥

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