श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.7.1

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

अथ सप्तमोऽध्यायः

प्रह्लादजीद्वारा माताके गर्भमें प्राप्त हुए नारदजीके उपदेशका वर्णन

नारद उवाच

एवं दैत्यसुतैः पृष्टो महाभागवतोऽसुरः।

उवाच स्मयमानस्तान्स्मरन् मदनुभाषितम्॥ १

evaṃ daityasutaiḥ pṛṣṭo mahābhāgavato'suraḥ|

uvāca smayamānastānsmaran madanubhāṣitam|| 1

अर्थ

नारदजी कहते हैं—युधिष्ठिर! जब दैत्यबालकोंने इस प्रकार प्रश्न किया, तब भगवान्‌के परम प्रेमी भक्त प्रह्लादजीको मेरी बातका स्मरण हो आया। कुछ मुसकराते हुए उन्होंने उनसे कहा॥ १॥

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