श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.6.30

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

बालस्यान्तःपुरस्थस्य महत्सङ्गो दुरन्वयः।

छिन्धि नः संशयं सौम्य स्याच्चेद्विश्रम्भकारणम्॥ ३०

bālasyāntaḥpurasthasya mahatsaṅgo duranvayaḥ|

chindhi naḥ saṃśayaṃ saumya syāccedviśrambhakāraṇam|| 30

अर्थ

तुम एक तो अभी छोटी अवस्थाके हो और दूसरे जन्मसे ही महलमें अपनी माँके पास रहे हो। तुम्हारा महात्मा नारदजीसे मिलना कुछ असंगत-सा जान पड़ता है। प्रियवर! यदि इस विषयमें विश्वास दिलानेवाली कोई बात हो तो तुम उसे कहकर हमारी शंका मिटा दो॥ ३०॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां सप्तमस्कन्धे प्रह्रादानुचरिते षष्ठोऽध्यायः॥ ६॥

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