श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.6.29

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

दैत्यपुत्रा ऊचुः

प्रह्राद त्वं वयं चापि नर्तेऽन्यं विद्महे गुरुम्।

एताभ्यां गुरुपुत्राभ्यां बालानामपि हीश्‍वरौ॥ २९

prahrāda tvaṃ vayaṃ cāpi narte'nyaṃ vidmahe gurum|

etābhyāṃ guruputrābhyāṃ bālānāmapi hīśvarau|| 29

अर्थ

प्रह्लादजीके सहपाठियोंने पूछा—प्रह्लादजी! इन दोनों गुरुपुत्रोंको छोड़कर और किसी गुरुको तो न तुम जानते हो और न हम। ये ही हम सब बालकोंके शासक हैं॥ २९॥

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