श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.8.3

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

श्रुत्वा तदप्रियं दैत्यो दुःसहं तनयानयम्।

कोपावेशचलद्गात्रः पुत्रं हन्तुं मनो दधे॥ ३

śrutvā tadapriyaṃ daityo duḥsahaṃ tanayānayam|

kopāveśacaladgātraḥ putraṃ hantuṃ mano dadhe|| 3

अर्थ

अपने पुत्र प्रह्लादकी इस असह्य और अप्रिय अनीतिको सुनकर क्रोधके मारे उसका शरीर थर-थर काँपने लगा। अन्तमें उसने यही निश्‍चय किया कि प्रह्लादको अब अपने ही हाथसे मार डालना चाहिये॥ ३॥

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