श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.8.9

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

स ईश्‍वरः काल उरुक्रमोऽसा-

वोजःसहःसत्वबलेन्द्रियात्मा ।

स एव विश्‍वं परमः स्वशक्तिभिः

सृजत्यवत्यत्ति गुणत्रयेशः॥ ९

sa īśvaraḥ kāla urukramo'sā-

vojaḥsahaḥsatvabalendriyātmā |

sa eva viśvaṃ paramaḥ svaśaktibhiḥ

sṛjatyavatyatti guṇatrayeśaḥ|| 9

अर्थ

वे ही महापराक्रमी सर्वशक्तिमान् प्रभु काल हैं तथा समस्त प्राणियोंके इन्द्रियबल, मनोबल, देहबल, धैर्य एवं इन्द्रिय भी वही हैं। वही परमेश्‍वर अपनी शक्तियोंके द्वारा इस विश्‍वकी रचना, रक्षा और संहार करते हैं। वे ही तीनों गुणोंके स्वामी हैं॥ ९॥✎ 605 606

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #605 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #606 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें