श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.1.14

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

अ३थाग्रे ऋषयः कर्माणीहन्तेऽकर्महेतवे।

ईहमानो हि पुरुषः प्रायोऽनीहां प्रपद्यते॥ १४

athāgre ṛṣayaḥ karmāṇīhante'karmahetave|

īhamāno hi puruṣaḥ prāyo'nīhāṃ prapadyate|| 14

अर्थ

इसीसे ऋषि-मुनि नैष्कर्म्यस्थिति अर्थात् ब्रह्मसे एकत्व प्राप्त करनेके लिये पहले कर्मयोगका अनुष्ठान करते हैं। प्रायः कर्म करनेवाला पुरुष ही अन्तमें निष्क्रिय होकर कर्मोंसे छुट्टी पा लेता है॥ १४॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—अथ यत्रर्षयः।

    (मुद्रित पृष्ठ 907)

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