परीक्षित्! दूसरे मनु हुए स्वारोचिष। वे अग्निके पुत्र थे। उनके पुत्रोंके नाम थे—द्युमान्, सुषेण और रोचिष्मान् आदि॥ १९॥✎ 651
स्वारोचिषो द्वितीयस्तु मनुरग्नेः सुतोऽभवत्।
द्युमत्सुषेणरोचिष्मत्प्रमुखास्तस्य चात्मजाः॥ १९
परीक्षित्! दूसरे मनु हुए स्वारोचिष। वे अग्निके पुत्र थे। उनके पुत्रोंके नाम थे—द्युमान्, सुषेण और रोचिष्मान् आदि॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.1.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 908) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/1/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)