श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.1.21

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

ऋषेस्तु वेदशिरसस्तुषिता नाम पत्न्यभूत्।

तस्यां जज्ञे ततो देवो विभुरित्यभिविश्रुतः॥ २१

ṛṣestu vedaśirasastuṣitā nāma patnyabhūt|

tasyāṃ jajñe tato devo vibhurityabhiviśrutaḥ|| 21

अर्थ

उस मन्वन्तरमें वेदशिरा नामके ऋषिकी पत्‍नी तुषिता थीं। उनके गर्भसे भगवान्‌ने अवतार ग्रहण किया और विभु नामसे प्रसिद्ध हुए॥ २१॥✎ 651

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #651 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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