स्वायम्भुव मनुकी पुत्री आकूतिसे यज्ञपुरुषके रूपमें धर्मका उपदेश करनेके लिये तथा देवहूतिसे कपिलके रूपमें ज्ञानका उपदेश करनेके लिये भगवान्ने उनके पुत्ररूपसे अवतार ग्रहण किया था॥ ५॥✎ 649
आकूत्यां देवहूत्यां च दुहित्रोस्तस्य वै मनोः।
धर्मज्ञानोपदेशार्थं भगवान्पुत्रतां गतः॥ ५
स्वायम्भुव मनुकी पुत्री आकूतिसे यज्ञपुरुषके रूपमें धर्मका उपदेश करनेके लिये तथा देवहूतिसे कपिलके रूपमें ज्ञानका उपदेश करनेके लिये भगवान्ने उनके पुत्ररूपसे अवतार ग्रहण किया था॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.1.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 905) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/1/5/
टिप्पणियाँ
८
प्रा० पा०—नु।
(मुद्रित पृष्ठ 905)
९
प्राचीन प्रतिमें ‘धर्मज्ञानोपदेशार्थं...’ से लेकर ‘...कपिलस्यानुवर्णितम्’ यहाँतकका पाठ इस प्रकार है—‘उत्पत्तिः सर्वजन्तूनां वर्णिता पुरुषर्षभ। चरितं पुण्यकीर्तेश्च कपिलस्यानुवर्णितम्॥’