इस प्रकार जल, स्थल एवं आकाशमें रहनेवाले तथा देखनेमें भयंकर शरीरवाले बहुत-से प्राणियोंपर चढ़कर कई दैत्य दोनों सेनाओंमें आगे-आगे घुस गये॥ १२॥
अन्ये जलस्थलखगैः सत्त्वैर्विकृतविग्रहैः।
सेनयोरुभयो राजन्विविशुस्तेऽग्रतोऽग्रतः॥ १२
इस प्रकार जल, स्थल एवं आकाशमें रहनेवाले तथा देखनेमें भयंकर शरीरवाले बहुत-से प्राणियोंपर चढ़कर कई दैत्य दोनों सेनाओंमें आगे-आगे घुस गये॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 952) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/12/