॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.10.37
गजास्तुरङ्गाः सरथाः पदातयः
सारोहवाहा विविधा विखण्डिताः।
निकृत्तबाहूरुशिरोधराङ्घ्रय-
श्छिन्नध्वजेष्वासतनुत्रभूषणाः॥ ३७
gajāsturaṅgāḥ sarathāḥ padātayaḥ
sārohavāhā vividhā vikhaṇḍitāḥ|
nikṛttabāhūruśirodharāṅghraya-
śchinnadhvajeṣvāsatanutrabhūṣaṇāḥ|| 37
अर्थ
उस समय अपने सवारोंके साथ हाथी, घोड़े, रथ आदि अनेकों प्रकारके वाहन और पैदल सेना छिन्न-भिन्न होने लगी। किसीकी भुजा, किसीकी जङ्घा, किसीकी गरदन और किसीके पैर कट गये तो किसी-किसीकी ध्वजा, धनुष, कवच और आभूषण ही टुकड़े-टुकड़े हो गये॥ ३७॥