॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.10.44
tataḥ śūlaṃ tataḥ prāsaṃ tatastomaramṛṣṭayaḥ|
yad yacchastraṃ samādadyātsarvaṃ tadacchinad vibhuḥ|| 44
अर्थ
इसके बाद बलिने एकके पीछे एक क्रमशः शूल, प्रास, तोमर और शक्ति उठायी। परन्तु वे जो-जो शस्त्र हाथमें उठाते, इन्द्र उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर डालते। इस हस्तलाघवसे इन्द्रका ऐश्वर्य और भी चमक उठा॥ ४४॥
टिप्पणियाँ
- २
प्रा० पा०—यष्टयः।
- ३
प्रा० पा०—यद्यद्दुर्मर्ष आदद्यात्०।