॥ श्रीहरिः ॥
सर्वतः शरकूटेन शक्रं सरथसारथिम्।
छादयामासुरसुराः प्रावृट्सूर्यमिवाम्बुदाः॥ २४
sarvataḥ śarakūṭena śakraṃ sarathasārathim|
chādayāmāsurasurāḥ prāvṛṭsūryamivāmbudāḥ|| 24
अर्थ
जैसे वर्षाकालके बादल सूर्यको ढक लेते हैं, वैसे ही असुरोंने बाणोंकी वर्षासे इन्द्र और उनके रथ तथा सारथिको भी चारों ओरसे ढक दिया॥ २४॥
सर्वतः शरकूटेन शक्रं सरथसारथिम्।
छादयामासुरसुराः प्रावृट्सूर्यमिवाम्बुदाः॥ २४
जैसे वर्षाकालके बादल सूर्यको ढक लेते हैं, वैसे ही असुरोंने बाणोंकी वर्षासे इन्द्र और उनके रथ तथा सारथिको भी चारों ओरसे ढक दिया॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 960) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/11/24/