परीक्षित्! उस आठ धारवाले पैने वज्रसे उन दैत्योंके भाई-बन्धुओंको भी भयभीत करते हुए उन्होंने बल और पाकके सिर काट लिये॥ २८॥
स तेनैवाष्टधारेण शिरसी बलपाकयोः।
ज्ञातीनां पश्यतां राजञ्जहार जनयन्भयम्॥ २८
परीक्षित्! उस आठ धारवाले पैने वज्रसे उन दैत्योंके भाई-बन्धुओंको भी भयभीत करते हुए उन्होंने बल और पाकके सिर काट लिये॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 960) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/11/28/