इसी प्रकार वायु, अग्नि, वरुण आदि दूसरे देवताओंने भी अपने अस्त्र-शस्त्रोंसे विपक्षियोंको वैसे ही मार गिराया जैसे सिंह हरिनोंको मार डालते हैं॥ ४२॥
अन्येऽप्येवं प्रतिद्वन्द्वान्वाय्वग्निवरुणादयः।
सूदयामासुरस्त्रौघैर्मृगान्केसरिणो यथा॥ ४२
इसी प्रकार वायु, अग्नि, वरुण आदि दूसरे देवताओंने भी अपने अस्त्र-शस्त्रोंसे विपक्षियोंको वैसे ही मार गिराया जैसे सिंह हरिनोंको मार डालते हैं॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 962) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/11/42/