नारदजीने कहा—देवताओ! भगवान्की भुजाओंकी छत्रछायामें रहकर आपलोगोंने अमृत प्राप्त कर लिया है और लक्ष्मीजीने भी अपनी कृपा-कोरसे आपकी अभिवृद्धि की है, इसलिये आपलोग अब लड़ाई बंद कर दें॥ ४४॥✎ 731
भवद्भिरमृतं प्राप्तं नारायणभुजाश्रयैः।
श्रिया समेधिताः सर्व उपारमत विग्रहात्॥ ४४
नारदजीने कहा—देवताओ! भगवान्की भुजाओंकी छत्रछायामें रहकर आपलोगोंने अमृत प्राप्त कर लिया है और लक्ष्मीजीने भी अपनी कृपा-कोरसे आपकी अभिवृद्धि की है, इसलिये आपलोग अब लड़ाई बंद कर दें॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 962) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/11/44/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)