॥ श्रीहरिः ॥
विष्वक्सेनो विषूच्यां तु शम्भोः सख्यं करिष्यति।
जातः स्वांशेन भगवान्गृहे विश्वसृजो विभुः॥ २३
viṣvakseno viṣūcyāṃ tu śambhoḥ sakhyaṃ kariṣyati|
jātaḥ svāṃśena bhagavāngṛhe viśvasṛjo vibhuḥ|| 23
अर्थ
विश्वसृज्की पत्नी विषूचिके गर्भसे भगवान् विष्वक्सेनके रूपमें अंशावतार ग्रहण करके शम्भु नामक इन्द्रसे मित्रता करेंगे॥ २३॥
विष्वक्सेनो विषूच्यां तु शम्भोः सख्यं करिष्यति।
जातः स्वांशेन भगवान्गृहे विश्वसृजो विभुः॥ २३
विश्वसृज्की पत्नी विषूचिके गर्भसे भगवान् विष्वक्सेनके रूपमें अंशावतार ग्रहण करके शम्भु नामक इन्द्रसे मित्रता करेंगे॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.13.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 971) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/13/23/