॥ श्रीहरिः ॥
मनुस्त्रयोदशो भाव्यो देवसावर्णिरात्मवान्।
चित्रसेनविचित्राद्या देवसावर्णिदेहजाः॥ ३०
manustrayodaśo bhāvyo devasāvarṇirātmavān|
citrasenavicitrādyā devasāvarṇidehajāḥ|| 30
अर्थ
तेरहवें मनु होंगे परम जितेन्द्रिय देवसावर्णि। चित्रसेन, विचित्र आदि उनके पुत्र होंगे॥ ३०॥
मनुस्त्रयोदशो भाव्यो देवसावर्णिरात्मवान्।
चित्रसेनविचित्राद्या देवसावर्णिदेहजाः॥ ३०
तेरहवें मनु होंगे परम जितेन्द्रिय देवसावर्णि। चित्रसेन, विचित्र आदि उनके पुत्र होंगे॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.13.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 972) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/13/30/