श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.13.36

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

राजंश्‍चतुर्दशैतानि त्रिकालानुगतानि ते।

प्रोक्तान्येभिर्मितः कल्पो युगसाहस्रपर्ययः॥ ३६

rājaṃścaturdaśaitāni trikālānugatāni te|

proktānyebhirmitaḥ kalpo yugasāhasraparyayaḥ|| 36

अर्थ

परीक्षित्! ये चौदह मन्वन्तर भूत, वर्तमान और भविष्य—तीनों ही कालमें चलते रहते हैं। इन्हींके द्वारा एक सहस्र चतुर्युगीवाले कल्पके समयकी गणना की जाती है॥ ३६॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामष्टमस्कन्धे मन्वन्तरानुवर्णनं
नाम त्रयोदशोऽध्यायः
॥ १३॥

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