॥ श्रीहरिः ॥
एतत् कल्पविकल्पस्य प्रमाणं परिकीर्तितम्।
यत्र मन्वन्तराण्याहुश्चतुर्दश पुराविदः॥ ११
etat kalpavikalpasya pramāṇaṃ parikīrtitam|
yatra manvantarāṇyāhuścaturdaśa purāvidaḥ|| 11
अर्थ
परीक्षित्! इस प्रकार मैंने तुम्हें महाकल्प और अवान्तर कल्पका परिमाण सुना दिया। पुराणतत्त्वके विद्वानोंने प्रत्येक अवान्तर कल्पमें चौदह मन्वन्तर बतलाये हैं॥ ११॥✎ 744 745 746
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामष्टमस्कन्धे चतुर्दशोऽध्यायः॥ १४॥
एतत् कल्पविकल्पस्य प्रमाणं परिकीर्तितम्।
यत्र मन्वन्तराण्याहुश्चतुर्दश पुराविदः॥ ११
परीक्षित्! इस प्रकार मैंने तुम्हें महाकल्प और अवान्तर कल्पका परिमाण सुना दिया। पुराणतत्त्वके विद्वानोंने प्रत्येक अवान्तर कल्पमें चौदह मन्वन्तर बतलाये हैं॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.14.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 973) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/14/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
- #744 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की
- #745 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की
- #746 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की