श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.15.11

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

वृतो विकर्षन् महतीमासुरीं ध्वजिनीं विभुः।

ययाविन्द्रपुरीं१ स्वृद्धां कम्पयन्‍निव रोदसी॥ ११

vṛto vikarṣan mahatīmāsurīṃ dhvajinīṃ vibhuḥ|

yayāvindrapurīṃ svṛddhāṃ kampayanniva rodasī|| 11

अर्थ

राजा बलिने इस बहुत बड़ी आसुरी सेनाको लेकर उसका युद्धके ढंगसे संचालन किया तथा आकाश और अन्तरिक्षको कँपाते हुए सकल ऐश्‍वर्योंसे परिपूर्ण इन्द्रपुरी अमरावतीपर चढ़ाई की॥ ११॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—रीमृद्धां।

    (मुद्रित पृष्ठ 975)

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