श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.15.25

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

भगवन्‍नुद्यमो भूयान्बलेर्नः पूर्ववैरिणः।

अविषह्यमिमं मन्ये केनासीत्तेजसोर्जितः॥ २५

bhagavannudyamo bhūyānbalernaḥ pūrvavairiṇaḥ|

aviṣahyamimaṃ manye kenāsīttejasorjitaḥ|| 25

अर्थ

‘भगवन्! मेरे पुराने शत्रु बलिने इस बार युद्धकी बहुत बड़ी तैयारी की है। मुझे ऐसा जान पड़ता है कि हमलोग उनका सामना नहीं कर सकेंगे। पता नहीं, किस शक्तिसे इनकी इतनी बढ़ती हो गयी है॥ २५॥

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