श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.15.34

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

तं विश्‍वजयिनं शिष्यं भृगवः शिष्यवत्सलाः।

शतेन हयमेधानामनुव्रतमयाजयन्॥ ३४

taṃ viśvajayinaṃ śiṣyaṃ bhṛgavaḥ śiṣyavatsalāḥ|

śatena hayamedhānāmanuvratamayājayan|| 34

अर्थ

जब बलि विश्‍वविजयी हो गये, तब शिष्यप्रेमी भृगुवंशियोंने अपने अनुगत शिष्यसे सौ अश्‍वमेध यज्ञ करवाये॥ ३४॥

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