श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.15

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

तस्मादीश भजन्त्या मे श्रेयश्चिन्तय सुव्रत।

हृतश्रियो हृतस्थानान्सपत्नैः पाहि नः प्रभो॥ १५

tasmādīśa bhajantyā me śreyaścintaya suvrata|

hṛtaśriyo hṛtasthānānsapatnaiḥ pāhi naḥ prabho|| 15

अर्थ

मेरे स्वामी! मैं आपकी दासी हूँ। आप मेरी भलाईके सम्बन्धमें विचार कीजिये। मर्यादापालक प्रभो! शत्रुओंने हमारी सम्पत्ति और रहनेका स्थानतक छीन लिया है। आप हमारी रक्षा कीजिये॥ १५॥

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