श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.19

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

क्‍व देहो भौतिकोऽनात्मा क्‍वचात्मा प्रकृतेः परः।

कस्य के पतिपुत्राद्या मोह एव हि कारणम्॥ १९

kva deho bhautiko'nātmā kvacātmā prakṛteḥ paraḥ|

kasya ke patiputrādyā moha eva hi kāraṇam|| 19

अर्थ

कहाँ यह पंचभूतोंसे बना हुआ अनात्मा शरीर और कहाँ प्रकृतिसे परे आत्मा? न किसीका कोई पति है, न पुत्र है और न तो सम्बन्धी ही है। मोह ही मनुष्यको नचा रहा है॥ १९॥

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