श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.26

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

सिनीवाल्यां मृदाऽऽलिप्य स्नायात् क्रोडविदीर्णया।

यदि लभ्येत वै स्रोतस्येतं मन्त्रमुदीरयेत्॥ २६

sinīvālyāṃ mṛdā''lipya snāyāt kroḍavidīrṇayā|

yadi labhyeta vai srotasyetaṃ mantramudīrayet|| 26

अर्थ

अमावस्याके दिन यदि मिल सके तो सूअरकी खोदी हुई मिट्टीसे अपना शरीर मलकर नदीमें स्नान करे। उस समय यह मन्त्र पढ़ना चाहिये॥ २६॥✎ 751

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #751 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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