श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.3

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

स पत्नीं दीनवदनां कृतासनपरिग्रहः।

सभाजितो यथान्यायमिदमाह कुरूद्वह॥ ३

sa patnīṃ dīnavadanāṃ kṛtāsanaparigrahaḥ|

sabhājito yathānyāyamidamāha kurūdvaha|| 3

अर्थ

परीक्षित्! जब वे वहाँ जाकर आसनपर बैठ गये और अदितिने विधिपूर्वक उनका सत्कार कर लिया, तब वे अपनी पत्‍नी अदितिसे—जिसके चेहरेपर बड़ी उदासी छायी हुई थी, बोले—॥ ३॥

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