परीक्षित्! जब वे वहाँ जाकर आसनपर बैठ गये और अदितिने विधिपूर्वक उनका सत्कार कर लिया, तब वे अपनी पत्नी अदितिसे—जिसके चेहरेपर बड़ी उदासी छायी हुई थी, बोले—॥ ३॥
स पत्नीं दीनवदनां कृतासनपरिग्रहः।
सभाजितो यथान्यायमिदमाह कुरूद्वह॥ ३
परीक्षित्! जब वे वहाँ जाकर आसनपर बैठ गये और अदितिने विधिपूर्वक उनका सत्कार कर लिया, तब वे अपनी पत्नी अदितिसे—जिसके चेहरेपर बड़ी उदासी छायी हुई थी, बोले—॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 978) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/3/