श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.34

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

नमस्त आदिदेवाय साक्षिभूताय२ ते नमः।

नारायणाय ऋषये नराय हरये नमः॥ ३४

namasta ādidevāya sākṣibhūtāya te namaḥ|

nārāyaṇāya ṛṣaye narāya haraye namaḥ|| 34

अर्थ

आप ही आदिदेव हैं। सबके साक्षी हैं। आप ही नरनारायण ऋषिके रूपमें प्रकट स्वयं भगवान् हैं। आपको मेरा नमस्कार॥ ३४॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—देवदेवाय ते।

    (मुद्रित पृष्ठ 982)

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