श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.59

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

त्वं चानेन महाभागे सम्यक्चीर्णेन केशवम्।

आत्मना शुद्धभावेन नियतात्मा५ भजाव्ययम्॥ ५९

tvaṃ cānena mahābhāge samyakcīrṇena keśavam|

ātmanā śuddhabhāvena niyatātmā bhajāvyayam|| 59

अर्थ

देवि! तुम भाग्यवती हो। अपनी इन्द्रियोंको वशमें करके शुद्ध भाव एवं श्रद्धापूर्ण चित्तसे इस व्रतका भलीभाँति अनुष्ठान करो और इसके द्वारा अविनाशी भगवान्‌की आराधना करो॥ ५९॥✎ 767

टिप्पणियाँ

  1. ५

    प्रा० पा०—भजनीयं।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 984)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #767 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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