श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.8

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

अप्यग्नयस्तु वेलायां न हुता हविषा सति।

त्वयोद्विग्नधिया भद्रे प्रोषिते मयि कर्हिचित्॥ ८

apyagnayastu velāyāṃ na hutā haviṣā sati|

tvayodvignadhiyā bhadre proṣite mayi karhicit|| 8

अर्थ

प्रिये! सम्भव है, मेरे बाहर चले जानेपर कभी तुम्हारा चित्त उद्विग्न रहा हो और समयपर तुमने हविष्यसे अग्‍नियोंमें हवन न किया हो॥ ८॥

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