॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.17.16
प्रायोऽधुना तेऽसुरयूथनाथा
अपारणीया इति देवि मे मतिः।
यत्तेऽनुकूलेश्वरविप्रगुप्ता
न विक्रमस्तत्र सुखं ददाति॥ १६
prāyo'dhunā te'surayūthanāthā
apāraṇīyā iti devi me matiḥ|
yatte'nukūleśvaravipraguptā
na vikramastatra sukhaṃ dadāti|| 16
अर्थ
परन्तु देवि! वे असुरसेनापति इस समय जीते नहीं जा सकते, ऐसा मेरा निश्चय है; क्योंकि ईश्वर और ब्राह्मण इस समय उनके अनुकूल हैं। इस समय उनके साथ यदि लड़ाई छेड़ी जायगी, तो उससे सुख मिलनेकी आशा नहीं है॥ १६॥