श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.18.17

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

तस्मा इत्युपनीताय यक्षराट् पात्रिकामदात्।

भिक्षां भगवती साक्षादुमादादम्बिका सती॥ १७

tasmā ityupanītāya yakṣarāṭ pātrikāmadāt|

bhikṣāṃ bhagavatī sākṣādumādādambikā satī|| 17

अर्थ

इस रीतिसे जब वामनभगवान्‌का उपनयन-संस्कार हुआ, तब यक्षराज कुबेरने उनको भिक्षाका पात्र और सतीशिरोमणि जगज्जननी स्वयं भगवती उमाने भिक्षा दी॥ १७॥✎ 782 783 1626

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #782 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #783 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #1626 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वामन-भगवान्‌का → वामनभगवान्‌का

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