इसके बाद भगवान्ने स्थापित और प्रज्वलित अग्निका कुशोंसे परिसमूहन और परिस्तरण करके पूजा की और समिधाओंसे हवन किया॥ १९॥✎ 784
समिद्धमाहितं वह्निं कृत्वा परिसमूहनम्।
परिस्तीर्य समभ्यर्च्य समिद्भिरजुहोद् द्विजः॥ १९
इसके बाद भगवान्ने स्थापित और प्रज्वलित अग्निका कुशोंसे परिसमूहन और परिस्तरण करके पूजा की और समिधाओंसे हवन किया॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.18.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 990) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/18/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)