॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.18.31
अद्याग्नयो मे सुहुता यथाविधि
द्विजात्मज त्वच्चरणावनेजनैः।
हतांहसो वार्भिरियं च भूरहो
तथा पुनीता तनुभिः पदैस्तव॥ ३१
adyāgnayo me suhutā yathāvidhi
dvijātmaja tvaccaraṇāvanejanaiḥ|
hatāṃhaso vārbhiriyaṃ ca bhūraho
tathā punītā tanubhiḥ padaistava|| 31
अर्थ
ब्राह्मणकुमार! आपके पाँव पखारनेसे मेरे सारे पाप धुल गये और विधिपूर्वक यज्ञ करनेसे, अग्निमें आहुति डालनेसे जो फल मिलता, वह अनायास ही मिल गया। आपके इन नन्हे-नन्हे चरणों और इनके धोवनसे पृथ्वी पवित्र हो गयी॥ ३१॥