श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.19.34

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

क्रमतो गां पदैकेन द्वितीयेन दिवं विभोः।

खं च कायेन महता तार्तीयस्य कुतो गतिः॥ ३४

kramato gāṃ padaikena dvitīyena divaṃ vibhoḥ|

khaṃ ca kāyena mahatā tārtīyasya kuto gatiḥ|| 34

अर्थ

ये विश्‍वव्यापक भगवान् एक पगमें पृथ्वी और दूसरे पगमें स्वर्गको नाप लेंगे। इनके विशाल शरीरसे आकाश भर जायगा। तब इनका तीसरा पग कहाँ जायगा?॥ ३४॥

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