श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.19.39

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

सत्यं पुष्पफलं विद्यादात्मवृक्षस्य गीयते।

वृक्षेऽजीवति तन्‍न स्यादनृतं मूलमात्मनः॥ ३९

satyaṃ puṣpaphalaṃ vidyādātmavṛkṣasya gīyate|

vṛkṣe'jīvati tanna syādanṛtaṃ mūlamātmanaḥ|| 39

अर्थ

यह शरीर एक वृक्ष है और सत्य इसका फल-फूल है। परन्तु यदि वृक्ष ही न रहे तो फल-फूल कैसे रह सकते हैं? क्योंकि नकार जाना, अपनी वस्तु दूसरेको न देना, दूसरे शब्दोंमें अपना संग्रह बचाये रखना—यही शरीररूप वृक्षका मूल है॥ ३९॥

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